हनुमान ने लंका ढूँढी
हनुमान लंका द्वीप के शहर में धीरे से उतरे। वह शहर बहुत बड़ा था और उसमें ढेर सारी इमारतें थीं।
"सीता कहाँ होंगी?" उन्होंने सोचा। उन्हें समझदारी और सावधानी से काम लेना था।
चुपचाप ढूँढने के लिए हनुमान एक छोटी बिल्ली जितने नन्हे हो गए। वे दबे पाँव बगीचों में घूमे और कोनों के पीछे झाँकते रहे।
वे इधर-उधर देखते रहे, बिल्कुल चुपचाप, ताकि किसी को पता न चले।
अपनी समझदारी से हनुमान ने थोड़ा-थोड़ा करके पूरा शहर छान मारा, और कभी हार नहीं मानी।
समझदार और सावधान दिमाग बड़ी-बड़ी मुश्किलें सुलझा देता है।
समझदारीक्या आप जानते हैं?
हनुमान अपना आकार बदल सकते थे — जब चाहें नन्हे, जब चाहें विशाल।
घर पर यह करके देखें
ध्यान से सोचकर कोई छोटी पहेली या मुश्किल सुलझाओ।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
हनुमान कहाँ उतरे?
जवाब: लंका
उन्होंने चुपचाप कैसे ढूँढा?
जवाब: नन्हे बनकर
हनुमान की खोज में किसने मदद की?
जवाब: उनकी समझदारी ने
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