बहादुर भी, नरम भी
राम बहुत मज़बूत और बहादुर थे। पर वे बहुत नरम और दयालु भी थे।
उन्होंने सबको दिखाया कि मज़बूत होने का मतलब कठोर या ज़ोर से बोलना नहीं होता।
"सच्ची ताक़त," राम ने कहा, "इतना बहादुर होना है कि तुम नरम रह सको। सबसे मज़बूत दिल वही है जो सबसे दयालु है।"
जब दूसरों की मदद करनी होती, वे बहादुर बनते; और हर मिलने वाले के साथ नरम रहते।
राम ने दुनिया को सिखाया कि बहादुरी और दया साथ-साथ चलती हैं।
असली ताक़त है एक ही समय पर बहादुर और नरम होना।
नरम ताक़तक्या आप जानते हैं?
राम को एक बड़े वीर के रूप में भी और एक नरम, प्यार भरे इंसान के रूप में भी पसंद किया जाता है।
घर पर यह करके देखें
जब तुम्हें लगे कि तुम मज़बूत या सही हो, तब भी नरम और दयालु रहो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
बहादुरी के अलावा राम कैसे थे?
जवाब: नरम और दयालु
राम ने सच्ची ताक़त किसे कहा?
जवाब: बहादुर होकर नरम रहना
कौन-सी दो बातें साथ-साथ चलती हैं?
जवाब: बहादुरी और दया
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